Thursday, November 21, 2019

#ShortStory: सासू माँँ की सीख !

वाह ! कितना सुंदर था वह समय, कितने सुंदर थे वे रिश्ते ।
मेघा की शादी हुए अभी तीन ही दिन हुए थे | कुछ रिश्तेदार अभी भी रुके हुए थे । चौका चढ़ाने की रस्म भी आ गई , और सासू माँ ने मेघा को हलवा बनाने के लिए रसोई में बुलाया । माँँ ने उसे हलवा बनाना खूब अच्छी तरह से सीखा रखा था और रसोई के काम करने का शौक भी खूब था । फिर भी कोई गलती ना हो जाए, बार -बार मेघा भगवान से यही प्रार्थना कर रही थी ।

बहुत ध्यान से और दिल लगाकर उसने हलवा बनाया । सबको हलवा खूब पसंद आया । सब ने दिल खोलकर प्रशंसा की । सासू माँँ भी फूली नहीं समा रही थी कि मेरी नई नवेली दुल्हन काम करने में इतनी निपुण है । सबने शगुन के तौर पर मेघा को मुँँह माँँगे तोहफे दिए और वो भी बहुत खुश थी कि चलो बिना किसी गलती के  इतना स्वादिष्ट हलवा बना और खूब प्रशंसा भी हुई ।

सब मेहमानों के जाने के बाद सासू माँँ ने मेघा को अपने पास बुलाया और प्यार से सिर पर हाथ फेरते हुए बोली; तुम तो बहुत अच्छा हलवा बना लेती हो, पर मेरी एक बात हमेशा याद रखना कि जब भी रसोई में काम करो तो कभी भी तुम्हारे बर्तनों की आवाज तुम्हारी रसोई से बाहर ना आए। जिस दिन यह बात एक औरत को समझ आ जाती है ना तो कभी घर की किसी कमी का ढिंढोरा और न ही घर की कोई चर्चा घर से बाहर जाती है।
अपनी सासू माँँ की सिखाई इस बात को मेघा ने जिंदगी भर के लिए गाँठ बाँध लिया! 

No comments:

Post a Comment