Thursday, November 21, 2019

#Story: अनमोल सीख !

निशा की शादी की तैयारियां खूब जोर शोर से हो रही थीं। जहां एक ओर निशा का मन शादी को लेकर प्रफुल्लित हो उठता था, वहीं दूसरी ओर एक नए परिवार में जाने के नाम से मन घबरा रहा था। सिर्फ कपिल को ही तो जानती थी वह और सब कैसे होंगे, कैसा होगा सबका स्वभाव यह सोचते ही वह डर सी जाती थी।
निशा माँ के साथ बैठी थी। मां कपड़ों की पैकिंग उठा उठाकर अटैची में लगा रही थी। जैसे ही निशा ने अपनी सास वाली साड़ी देखी तो एकदम माँ से पूछ बैठी- "माँ, मुझे डर लगता है, क्या ससुराल में सब के साथ मैं अच्छे से रह पाऊँगी?"
"ऐसा क्यों पूछ रही हो?"- माँ उसकी तरफ़ देखते हुए बोली।
"माँ, जैसे सब कहते हैं कि सास बहू की कभी नहीं बनती, पर मैं तो चाहती हूं कि मेरी सास और मेरी खूब बने" निशा जवाब में बोली।
माँ ने उसके दोनों हाथ अपने हाथ में ले लिए और बोली- "बेटा, प्यार और विश्वास से हर रिश्ता खूबसूरत बन जाता है। हमेशा जो मान-सम्मान और प्यार हम दूसरों से अपने लिए चाहते हैं, वही मान-सम्मान और प्यार हमें दूसरों को पहले देना पड़ता है।"
निशा के चेहरे पर अब मुस्कान आ गई थी।
माँ अपनी बात को पूरा करते हुए फिर बोली - "बेटा, तुमने कभी नोटिस किया है कि कहा जाता है जैसे- माँजी, आपका बेटा (अपने पति के बारे में सास से बात करते हुए) दीदी, आप के भैया (अपने पति के बारे में ननद से बात करते हुए) जैसे मैं भी जब पापा की बात करती हूं तो कहती हूँ 'तुम्हारे पापा' यानि यदि तुम 'मैं' और 'मेरा' की भावना न रखकर 'आप' 'आपका' 'तुम' 'तुम्हारा' का व्यवहार करोगी तो सब अपने आप तुम्हारे हो जाएँगे।
निशा की समझ में पूरी बात आ गई थी ।
निशा कपड़ों में से कपिल की ड्रैस की तरफ देखते हूए बोली - माँ, आप के दामाद जी की ड्रैस तो बहुत खूबसूरत है और दोनों मां-बेटी ठहाका मारकर हँसने लगी।
वास्तव में यदि हम अपने रिश्तो में सुंदरता लाना चाहते हैं तो हमें पहले अपने "मैं" यानि अहं को खत्म करना होगा। यदि हम प्यार चाहते हैं तो हमें प्यार बाँटना भी होगा, तभी रिश्तो की सुंदरता निखर कर सामने आएगी।
मधु धीमान

कैथल (हरियाणा)

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