रंजना की शादी को आज पूरा एक हफ्ता हो चुका था। शादी के तीसरे दिन से ही वह और उसके पति दोनों कहीं ना कहीं , किसी ना किसी रिश्तेदार के यहाँ खाने पर जा रहे थे । आज फिर उन्हें अपने ही शहर में अपनी चाची के घर जाना था। सही समय पर रंजना और पतिदेव दोनों तैयार हो गए और चल पड़े चाची के घर ।
बातचीत करते-करते कब चाची का घर आ गया पता ही ना चला । चाची के घर में भव्य रुप से स्वागत किया गया दोनों का । चाची की बिटिया ने चाय बनाई और विभिन्न पकवानों से मेज़ सजा दी ।
तभी चाची जी बोल पड़ी - बहू ,यह गुलाब जामुन तो खाओ। रंजना ने भी हां-जी , अभी लेती हूं - कहकर गर्दन हिलाई ।
तभी दूसरे कमरे में बैठे चाचा जी बोले - बहू रानी को गुलाब जामुन खिलाए या नहीं ?
बीच - बीच में बातचीत का दौर चलता रहा ।कुछ ही देर में चाची जी का बेटा जोकि पढ़ने के लिए गया हुआ था , वापस आ गया था । आते ही बोला - भाभी जी ने गुलाब जामुन खाए या नहीं ?
अब रंजना के सब्र का बांध टूट चुका था । वह थोड़ा सा सकुचाते हुए चाची जी से बोली - चाची जी , क्या यह कोई स्पेशल गुलाब जामुन हैं ,सभी लोग गुलाब जामुन खिलाने की बात कर रहे हैं ।
चाची जी हँसते हुए बोली - बेटा , मुकेश ने हमें कल बताया था कि तुम्हें गुलाबजामुन बहुत पसंद हैं सो कल शाम तुम्हारे लिए यह गुलाब जामुन हम सब ने मिलकर बनाए हैं ।
अब रंजना को याद आ गया कि शादी के बाद वह जितने भी रिश्तेदारों के घर गई सब की मेज पर गुलाब जामुन की प्लेट सजी हुई थी ।
रंजना मुकेश की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी , तब मुकेश ने झट से गुलाब जामुन की प्लेट उठाकर उसके सामने कर दी । रंजना बोली - अरे ,मेरे भोले पतिदेव, मुझे बेशक गुलाब जामुन बहुत पसंद है पर केवल एक या दो ही खा सकती हूँ मैं ।
रिश्तों में इतनी मिठास, आपकी छोटी-छोटी पसंद , छोटी-छोटी खुशी का ध्यान रखा जाना - वाह ! कितना सुंदर प्यार है यह । यही सब छोटे -छोटे किस्से - कहानियाँ आपके जीवन में उमंग - उत्साह का नव संचार करते हैं । मधु धीमान
कैथल ( हरियाणा )
बातचीत करते-करते कब चाची का घर आ गया पता ही ना चला । चाची के घर में भव्य रुप से स्वागत किया गया दोनों का । चाची की बिटिया ने चाय बनाई और विभिन्न पकवानों से मेज़ सजा दी ।
तभी चाची जी बोल पड़ी - बहू ,यह गुलाब जामुन तो खाओ। रंजना ने भी हां-जी , अभी लेती हूं - कहकर गर्दन हिलाई ।
तभी दूसरे कमरे में बैठे चाचा जी बोले - बहू रानी को गुलाब जामुन खिलाए या नहीं ?
बीच - बीच में बातचीत का दौर चलता रहा ।कुछ ही देर में चाची जी का बेटा जोकि पढ़ने के लिए गया हुआ था , वापस आ गया था । आते ही बोला - भाभी जी ने गुलाब जामुन खाए या नहीं ?
अब रंजना के सब्र का बांध टूट चुका था । वह थोड़ा सा सकुचाते हुए चाची जी से बोली - चाची जी , क्या यह कोई स्पेशल गुलाब जामुन हैं ,सभी लोग गुलाब जामुन खिलाने की बात कर रहे हैं ।
चाची जी हँसते हुए बोली - बेटा , मुकेश ने हमें कल बताया था कि तुम्हें गुलाबजामुन बहुत पसंद हैं सो कल शाम तुम्हारे लिए यह गुलाब जामुन हम सब ने मिलकर बनाए हैं ।
अब रंजना को याद आ गया कि शादी के बाद वह जितने भी रिश्तेदारों के घर गई सब की मेज पर गुलाब जामुन की प्लेट सजी हुई थी ।
रंजना मुकेश की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी , तब मुकेश ने झट से गुलाब जामुन की प्लेट उठाकर उसके सामने कर दी । रंजना बोली - अरे ,मेरे भोले पतिदेव, मुझे बेशक गुलाब जामुन बहुत पसंद है पर केवल एक या दो ही खा सकती हूँ मैं ।
रिश्तों में इतनी मिठास, आपकी छोटी-छोटी पसंद , छोटी-छोटी खुशी का ध्यान रखा जाना - वाह ! कितना सुंदर प्यार है यह । यही सब छोटे -छोटे किस्से - कहानियाँ आपके जीवन में उमंग - उत्साह का नव संचार करते हैं । मधु धीमान
कैथल ( हरियाणा )
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