Thursday, November 21, 2019

#Story# लौट आया आत्मविश्वास !

ईशा स्कूल से तेज कदमों के साथ वापस आई और दरवाजे में घुसते ही बैग एक तरफ फेंकते हुए ऊँचे स्वर में - माँ ……..माँ …...कहां हो ?
गीले हाथ पोंछती हुई माँ रसोई से बाहर आते हुए बोली - क्या बात है ऐसे क्यों शोर मचा रखा है ?
माँ, मैं कल स्कूल नहीं जाऊँगी …….रोते हुए वह बोली । क्या हुआ मैथ्स वाली मैडम से डाँट पड़ गई क्या - मां प्यार से दुलारते हुए बोली ।
ईशा माँ का हाथ झटकते हुए बोली - नहीं माँ, नहीं, बस मैं अब कभी स्कूल नहीं जाऊँगी , फिर औंधे मुंह बैड पर लेट गई ।
निशा नौवीं कक्षा की छात्रा थी । यूँ तो पढ़ने में खूब मेधावी थी ,पर किसी भी अतिरिक्त गतिविधि में भाग नहीं ले पाती थी । दरअसल वह कद - काठी में खूब लंबी थी , जिस कारण नाच - गाना आदि किसी प्रतियोगिता में उसकी हिस्सेदारी नहीं होती थी ।आज फिर एक बार ईशा माँ के सामने बैठ रोती ही जा रही थी ।
माँ ने उसे शांत होने के लिए कहा और बोली - ईशा रोना बंद करो और मुझे आराम से बैठ कर बताओ कि हुआ क्या है । ईशा ने अपनी मां का हाथ पकड़ लिया और रोते हुए बोली - मां क्या मैं बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती हूँ , क्या मैं घोड़े जैसी चलती हूँ , मैं इतनी लंबी क्यों हूँ माँ ? - यह कहकर वह ज़ोर ज़ोर से रोने लगी ।
माँ समझ गई थी कि स्कूल में कुछ तो हुआ है ।
बोलो , किसने क्या कह दिया तुमसे ? - मां ने दुखी स्वर में पूछा ।
माँ आज एन.सी .सी. के लिए जब छात्र-छात्राएँ चुने जा रहे थे तो मैडम मेरे खड़े होते ही बोली - तुम तो रहने ही दो ईशा । बिल्कुल घोड़े की तरह तो चलती हो तुम ।
मां को भी यह सुन बिल्कुल अच्छा नहीं लगा ।
पर वह ईशा को समझाते हुए बोली - बेटा ,नहीं …...तुम लंबी हो , यह तुम्हारा कोई अवगुण नहीं है बल्कि गुण है । देखो , अमिताभ - दीपिका सभी तो लंबे हैं, तो क्या उनकी कोई पहचान नहीं , तुम लंबी हो इसी कारण तुम्हारे कदम भी लंबे हैं और यही वजह है कि तुम दूसरे बच्चों से ज्यादा तेज चलती हो ।
अच्छा मां इसीलिए मैडम इसे घोड़े जैसी चाल बताती हैं……. वह अब कुछ शांत थी ।
तुम्हारी मैडम का बात कहने का अपना ढंग है परंतु वास्तविकता यह है कि लंबा होना तुम्हारा गुण है कोई दोष नहीं । यही कारण है कि तुम दूसरे बच्चों से तेज चलती हो । देखो , तुम दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेना । मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी बेटी दौड़ प्रतियोगिता में अवश्य ही जीतेगी और जीतेगी भी क्यों नहीं महाराणा प्रताप के चेतक से तेज दौड़ती है मेरी बेटी ।
यह सुनते ही ईशा का खोया आत्मविश्वास लौट आया और वह मुस्कुरा दी ।  इस छोटी सी कहानी के माध्यम से मैं सभी से यह निवेदन करना चाहती हूँ कि कभी भी किसी की शारीरिक बनावट को लेकर उसका अपमान ना करें । यह रूप- रंग - काया सब भगवान की देन है। किसी व्यक्ति की चाल - ढाल उसकी शारीरिक बनावट पर ही निर्भर करती है , इसलिए हर व्यक्ति को प्रभु की सर्वोत्तम कृति समझकर सम्मान दें ।
 धन्यवाद
मधु धीमान

कैथल - हरियाणा

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